नीरज सेन ने रक्तदान कर जच्चा बच्चा को दिया नया जीवनदान !!
*पति छोड़कर परिवार के अन्य सदस्यों ने खून देने से कर दिया था इंकार*
*समाजसेवी राम बिहारी गोस्वामी एवं बृजेश रैकवार के प्रयासों से समय पर मिला पीड़ित महिला को खून*
पन्ना जिले के अमानगंज तहसील क्षेत्र के ग्राम मकरंदगंज सिमरिया निवासी श्रीमती अंजू पटेल पति राजेंद्र पटेल उम्र 30 वर्ष को नवजात बच्चे को जन्म देने के बाद अचानक खून की अत्यधिक कमी आ गई थी। जिसके चलते गत दिनांक 3 जून की रात्रि को पीड़ित पति राजेंद्र पटेल द्वारा स्वयं रक्तदान कर एक यूनिट ब्लड प्राप्त किया गया था। मगर आज दिनांक 4 जून को जब पुन्हा खून की कमी चिकित्सक द्वारा बतलाई गई , तब पीड़ित पति राजेंद्र पटेल द्वारा अपने सगे संबंधियों एवं रिश्तेदारों से रक्तदान करने के लिए आग्रह किया गया था। मगर रिश्तेदारों एवं परिवार के सदस्यों ने खून देने से साफ इनकार कर दिया। जिसके बाद पीड़ित पति राजेंद्र पटेल द्वारा अपनी परेशानी पन्ना जिले के समाजसेवी राम बिहारी गोस्वामी को दूरभाष से बतलाई गयी। समाजसेवी राम बिहारी गोस्वामी द्वारा सोशल मीडिया पर संदेश जारी किया गया। व्हाट्सएप पर संदेश देवेंद्रनगर तहसील क्षेत्र के देवरीगढ़ी निवासी नीरज सेन पिता मूलचंद सेन हाल निवासी पन्ना द्वारा व्हाट्सएप पर पढ़ा गया । जिसके बाद समाजसेवी नीरज सेन द्वारा बिना कोई विलंब किए पीड़ित पति राजेंद्र पटेल से दूरभाष पर संपर्क किया गया और उन्होंने स्वेच्छा से रक्तदान करने की सहमत प्रदान की । जैसे ही रक्तदान दाता नीरज सेन ब्लड बैंक पन्ना पहुंचे वहां पर समाज सेवी बृजेश रैकवार मौके पर पहुंचे और उन्होंने अपनी मौजूदगी में पीड़ित महिला के लिए रक्तदान का कार्य संपन्न कराया । इस अवसर पर लैब टेक्नीशियन राजकुमार एवं राजेंद्र कुमार पटेल बृजेश रैकवार सहित ब्लड बैंक के अन्य कर्मचारी गण मौजूद रहे। रक्तदान दाता नीरज सेन ने कहा कि उनके द्वारा दूसरी बार रक्तदान किया गया है। इसके पूर्व भी धरमपुर क्षेत्र के एक मासूम बच्चे को जब ब्लड की जरूरत थी तब संदेश प्राप्त होने पर पहली बार रक्तदान बच्चे को किया गया था। इसके उपरांत आज पुन्हा सौभाग्य प्राप्त हुआ एवं जच्चा-बच्चा का जीवन बचाने को रक्तदान करने का अवसर प्राप्त हुआ है। श्री सेन ने कहा कि रक्तदान प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को 18 वर्ष से लेकर 55 वर्ष तक अवश्य करना चाहिये। रक्तदान करने से किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती है। रक्तदान करने से जो आत्मिक संतुष्टि प्राप्त होती है उसको बयां नहीं किया जा सकता है। समय पर किए गए रक्तदान से किसी पीड़ित परिवार के सदस्य का जीवन बचाया जा सकता है।
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