आ राहा टिड्डी दल कैसे करें बचाव जाने ।

टिड्डी दल से कैसे करें बचाव
छतरपुर :- किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के उप संचालक श्री मनोज कश्यप ने टिड्डी दल से फसलों के बचाव के लिए किसानों से सतर्क रहने का आग्रह किया है। उन्होंने टिड्डी दल से फसलों के बचाव के लिए जिले के किसानों को सामयिक सलाह देते हुए बताया है कि प्रदेश के कई भागों में टिड्डी दल के प्रकोप की खबरें प्राप्त हो रही हैं जो छतरपुर जिले में भी पहुंच सकती है। टिड्डा/टिड्डी दल फसलों को नुकसान पहुंचाने वाला कीट हैं जो कि समूह में एक साथ चलता है और बहुत लम्बी-लम्बी दूरियों  तक उड़ान भरता है। 

यह फसल को चबाकर, काटकर खाने से नुकसान पहुंचाता है। अत: स्पष्ट है कि ये उद्यानिकी फसलों, वृक्षों एवं कृषि की फसलों को बहुत बड़े स्वरूप में एक साथ हानि पहुँचा सकता है। यदि जिले में टिड्डी दल का प्रकोप होता है तो इसके नियंत्रण के लिये किसान भाई दो प्रकार के साधन अपना सकते है।

भौतिक साधन:- जिसमें किसान भाई टोली बनाकर विभिन्न प्रकार से परम्परागत उपाय जैसे शोर मचाकर, ध्वनि वाले यंत्रों को बजाकर डराकर भगाया जा सकता है इसके लिये मांदल, ढोलक, ट्रैक्टर / मोटर साइकिल का सायलेंसर, खाली टीन के डिब्बे , थाली इत्यादि से भी सामूहिक प्रयास से ध्वनि की जा सकती है। ऐसा करने से टिड्डी दल नीचे नहीं आकर फसलों पर न बैठकर आगे प्रस्थान कर जाते है। 

रसायनिक नियंत्रण:- रसायनिक नियंत्रण मे सुबह से कीटनाशी दवा ट्रैक्टर चलित स्ने पंप, पावर स्प्रेयर द्वारा, जैसे क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी 1200 मिली या डेल्टामेथरिन 2.8 इसी 600 मिली अथवा लेम्डाईलोथिन 5 इसी 400 मिली, डाईफलूबिनज्यूरॉन 25 डब्ल्यूटी 240 ग्राम प्रति हैक्ट 600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। 

टिड्डी दल वर्तमान में ग्वालियर संभाग तक पहुँच गया है, जो कि हवा की गति अनुसार लगभग 100-150 कि.मी. प्रति घंटा की गति से उड़ती है। सभी किसान भाईयों से अनुरोध है कि, सतत निगरानी रखें और टिड्डी दल का प्रकोप होने पर बताई गई विधियों को अपनाकर फसलों का बचाव करें।

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